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Sunday, November 21, 2010

डिलीट या फॉर्मेट हो गए फाइल/फोल्डर पुनः प्राप्त करें

From : http://deepeshgautam.blogspot.com/2010/11/blog-post_1149.html#comment-form

Friday, November 19, 2010

डिलीट या फॉर्मेट हो गए फाइल फोल्डर पुनः प्राप्त करें


आपको भी कभी न कभी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ा होगा की आपने कोई फाइल या फोल्डर गलती से डिलीट कर दी हो या हो गयी हो .


अथवा किसी समस्या के कारण आपको अपना कंप्यूटर फॉर्मेट करना पड़ा हो इस कारण आपकी कुछ जरुरी फाइल या फोल्डर आपको गंवाने पड़े हो ।

इस बड़ी समस्या के समाधान के लिए केवल 2 एमबी का पोर्टेबल औजार जिसमे आप केवल डिस्क ड्राइव ही नहीं यूएसबी पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड तक से खोया हुआ डाटा वापस पा सकेंगे


इसे डाउनलोड कर ओपन कीजिये पोर्टेबल है इसलिए इन्स्टाल करने की जरुरत नहीं है ।


अगर आपको डिलीट हो गए फाइल वापस पानी है तो मुख्य विंडो में पर क्लिक कीजिये ।

अब ऊपर चित्र में दिखाए अनुसार पर क्लिक कीजिये आपको डिलीट हो गयी फाइल की एक सूची मिलेगी


अब ऊपर दिए चित्र की तरह अपनी इच्छित फाइल या फोल्डर को चुनिए फिर सेव फाइल पर क्लिक करके उसे सेव कर लीजिये ।

वैसे ही अगर फॉर्मेट की गई डिस्क से डाटा प्राप्त करना हो तो मुख्य विंडो में Advanced Recovery पर क्लिक कीजिये ।


इस तरह से खुली विंडो में जिस ड्राइव से आप डाटा प्राप्त करना चाहते है उसे सेलेक्ट करके Full Scan पर क्लिक करें ।
इस प्रक्रिया में थोडा समय जरुर लगता है आपके ड्राइव के आकार के अनुसार । सेव करने की प्रक्रिया जैसे ऊपर बताई गयी है वैसे ही है । पहले भी ये प्रोग्राम दिया जा चुका है पर ये नया और बेहतर संस्करण है ।

इस प्रोग्राम को डाउनलोड करने यहाँ क्लिक करें

ये सॉफ्टवेयर उपयोगी है और खतरनाक भी, आप अपने व्यक्तिगत इलेक्ट्रोनिक डाटा को हटाने के लिए ज्यादा से ज्यादा उसे डिलीट कर सकते या फॉर्मेट पर फिर भी उसे हासिल किया जा सकता है

इसलिए इसे अपने विवेक/जरुरत के अनुसार प्रयोग करें हमेशा नहीं ! उपरोक्त कार्य करने में अगर कोई गलती होती है तो आपकी जवाबदारी होगी !

Wednesday, August 4, 2010

अपने माउस कर्सर में लगाइए कार्टून

From : http://aman-bhangu.blogspot.com/2010/08/987.html

Tuesday, August 3, 2010

अपने माउस कर्सर में लगाइए कार्टून


अपने माउस कर्सर को बनाइये मजेदार उसमें कार्टून जोड़कर ।जब आपका इसका प्रयोग करेंगे तो ये टास्क बार में भी एक आइकन के रूप में रहेगा इस पर क्लिक करके आप कार्टून चित्रों को बदल भी सकते हैं ।एक छोटा मुफ्त 987 केबी का मजेदार औजार ।



इसे डाउनलोड करने यहाँ क्लिक करें ।

दूसरी सीधी डाउनलोड लिंक यहाँ है ।

अपने विंडोज एक्सपी को दें Mac OS X Leopard का रूप

अपने विंडोज एक्सपी को बदलिए Mac OS X Leopard के आकर्षक रूप में ।
फोल्डर को अलग रंग देने, ऊपरी टास्कबार, आकर्षक प्रोग्राम लांचर और पारदर्शी टास्कबार जैसी सुविधाएँ ।
एक ट्रांस्फोर्मेशन पैक जो आपके एक्सपी को ज्यादा सुन्दर और उपयोगी बनाता है ।
40 एमबी आकार का मुफ्त औजार ।

इसे डाउनलोड करने यहाँ क्लिक करें ।

Thursday, July 22, 2010

क्या आप लोगिन पासवर्ड भूल गए

WEDNESDAY, JULY 21, 2010

क्या आप लोगिन पासवर्ड भूल गए

जब लोगिन स्क्रीन आती है तब ctrl+alt+del को दो बार दबाओं

फिर एक नई स्क्रीन आयगी इसमें टाइप करो

user name adminstrator

pass word नहीं डालना है आपका कम हो जायेगा
ok

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Thursday, February 25, 2010

10 चीजें जो आप गूगल वेव पर नहीं कर सकते

10 चीजें जो आप गूगल वेव पर नहीं कर सकते

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waveगूगल ने इसे ‘ईमेल कीलर’ कहा है यानी कि एक ऐसा नया माध्यम जिसके आने के बाद ईमेल करना पूरानी फैशन हो जाएगी! यहगूगल वेव है जिसका प्रीव्यू आम लोगों के लिए उपलब्ध है. यदि आप अभी तक गूगल वेव अकाउंट प्राप्त नहीं कर पाएँ हैं तो यहाँ आवेदन कर सकते हैं अथवा अपने किसी जीमेल प्रयोक्ता मित्र के द्वारा आपको निमंत्रित किए जाने तक इंतजार कर सकते हैं.

गूगल वेव एक ऐसी सेवा है जिसके माध्यम से कई लोग एक साथ चैट कर सकते हैं, डोक्यूमेंट साझा कर सकते हैं, एक साथ किसी प्रोजेक्ट पर चर्चा कर सकते हैं तथा अन्य कई कार्य कर सकते हैं.

लेकिन वेव अभी भी अपने परीक्षण काल से गुजर रहा है और इसमें कई कमियाँ पाई गई हैं.उनमें से 10 प्रमुख कमियाँ –
  1. गूगल वेव में कोई प्रयोक्ता कुछ लिखता है तो उस वेव से जुड़े अन्य लोगों को वह दिखता रहता है. यह रीयल टाइम ड्राफ्टिंग बंद नहीं की जा सकती. [गूगल के अनुसार यह फीचर जोड़ा जाएगा]
  2. वेब में लोगों को जोड़ा तो जा सकता है लेकिन निकाला नहीं जा सकता. इसलिए यदि किसी व्यक्ति को भूल से किसी वेव में शामिल कर लिया जाए तो गडबड हो सकती है. [यह फीचर भी जोड़ा जाएगा]
  3. इस समय कोई भी प्रयोक्ता जो किसी वेव से जुड़ा हो वह संदेशों को सम्पादित कर सकता है. “रीड ओनली” वेव विकल्प उलब्ध नहीं है.
  4. वेव में “अन डू (Ctrl+Z)” सुविधा नही है.
  5. लम्बे वेब में से थोड़ा सा हिस्सा निकाल कर अलग थ्रेड शुरू नहीं के जा सकती. [गूगल के अनुसार यह फीचर जोड़ा जाएगा]
  6. दो वेव को एक साथ जोड़ा नहीं जा सकता
  7. वेव पर आप छूपे हुए (इनविजिबल) नहीं रह सकते
  8. वेब पर आप कोंटेक्ट ग्रुप नहीं बना सकते
  9. अपनी वेव से जुड़े किसी सदस्य को आप उस वेव को “पब्लिक” करने से नहीं रोक सकते. इससे गोपनियता भंग होने का खतरा बना रहता है.
  10. आप ढेर सारे वेव को समायोजित नहीं कर सकते.

Friday, February 19, 2010

क्या कंप्यूटर की सुस्ती से परेशान हैं

क्या कंप्यूटर की सुस्ती से परेशान हैं








क्या आपका कंप्यूटर बार-बार हैंग हो जाता है? क्या आपका कंप्यूटर बहुत स्लो है और कमांड देने के बाद हमेशा इंतजार करना पड़ता है? कहीं एसा तो नहीं की आपके कंप्यूटर में वायरसों की पूरी कॉलोनी बस गई है ? ऐसी ही तमाम आशंकाएं हर कंप्यूटर यूजर के दिमाग में चलती रहती हैं । आइये जानें कंप्यूटर की स्पीड बढ़ाने के तरीके:

जेसा की हम जानते हैं कंप्यूटर बिना ऑर्डर के न तो काम शुरू करता है और न ही बंद होता है। किसी भी विंडो को क्लोज करने से पहले भी यह यूजर की सहमति मांगता है- 'डू यू वॉन्ट टु सेव द चेंजेज'। यूजर के पास तीन ऑप्शन होते हैं- यस, नो और कैंसल। इनमें से किसी एक ऑप्शन पर क्लिक करते ही आप उम्मीद कर सकते हैं कि यह मशीन आपके कमांड के अनुसार फौरन ऐक्शन शुरू कर देता है । अगर कंप्यूटर ने आपके आदेश को मानने में चंद सेकंड की देरी की तो मान लें कि आपकी इस स्पीड मशीन का सिस्टम स्लो है। यदि ध्यान नहीं दिया गया तो कंप्यूटर का यह मर्ज 'हैंग' के रूप में दिखने लगेगा।

कब मानें कंप्यूटर है स्लो?

एक्सपर्ट नलिन गौड़ का मानना है कि सिस्टम को स्लो या फास्ट कहने का कोई मानक तय नहीं है। नीचे लिखी सूरतों में आप मान सकते हैं कि आप का पीसी स्लो है:
  • जब कंप्यूटर ऑन करते हैं तो उसके शुरू होने में एक मिनट से ज्यादा वक्त लगे।
  • ऐप्लिकेशन के यूज के दौरान डायलॉग बॉक्स के स्क्रीन पर दिखने में 15 सेकंड से ज्यादा समय लगे

  • कमांड देने के बाद विंडो 10 सेकंड तक ओपन न हो।


स्लो होने की खास वजहें:

1. RAM की कपैसिटी कम होने और ऐप्लिकेशन का बोझ बढ़ने से

2. सिस्टम वायरस की चपेट में आने से

3. नकली या फिर बिना लाइसेंस वाले सॉफ्टवेयर का यूज करने से

4. नए ऐप्लिकेशन और सीपीयू की स्पीड में तालमेल नहीं होने से

5. एक साथ कई ऐप्लिकेशंस पर काम करने से

6. गेम्स और साउंड व हेवी पिक्चर वाले स्क्रीनसेवर भी कंप्यूटर की स्पीड को कम कर देते हैं

मेमरी में है दम तो प्रॉब्लम होगी कम

माइक्रोटेक सिस्टम के डायरेक्टर एस. सी. जैन के अनुसार ज्यादातर RAM की कपैसिटी कम होने और वर्क लोड लगातार बढ़ने की वजह से कंप्यूटर की स्पीड कम हो जाती है। इसलिए यूज के हिसाब से RAM की कपैसिटी बढ़ानी चाहिए। दरअसल क्वॉर्क, फोटोशॉप, विडियो प्लेयर जैसे कई ऐप्लिकेशन स्पेस के भूखे होते हैं। इन पर काम करने के साथ ही मेमरी में स्पेस कम होता जाता है। इस दौरान जब कई सॉफ्टवेयर पर एक साथ काम किया जाता है, तब कंप्यूटर के हैंग और स्लो होने का खतरा बढ़ जाता है। 2 जीबी की RAM, 3 मेगाहर्ट्ज की स्पीड में चलने वाला सीपीयू और 160 से 320 जीबी तक की हार्ड डिस्क से लैस कंप्यूटर में स्लो या हैंग होने की दिक्कत कम आती है।

कैसे जानें यूजर स्पेस का हाल

जब हम एक साथ कई ऐप्लिकेशंस को ऑपरेट करते हैं तो मेमरी स्पेस कम हो जाता है। इसलिए जब कंप्यूटर स्लो होने लगे तो चेक करें कि कौन सा ऐप्लिकेशन प्रॉसेसर को रोक रहा है या कितने स्पेस का यूज हो रहा है। चेक करने का तरीका आसान है:

स्टेप1 - CRTL ALT DEL करें, एक नई विंडो स्क्रीन सामने आएगी। इसमें टास्क मैनेजर पर क्लिक करें।

स्टेप 2 - फिर उसमें 'प्रॉसेसेज' का बटन क्लिक करें।

स्टेप 3- स्क्रीन पर एक लिस्ट दिखेगी, अब मेम. यूसेज पर क्लिक करें। फाइलें अरेंज हो जाएंगी। अब फाइल्स और ऐप्लिकेशन की साइज के मुताबिक अपनी फौरी प्राथमिकता तय करें यानी यह तय करें कि फिलहाल किस ऐप्लिकेशन को बंद किया जा सकता है और किसे नहीं।

स्टेप 4 - फिर उस ऐप्लिकेशन को बंद करें, कंप्यूटर की स्पीड बढ़ जाएगी।

स्लो कंप्यूटर से बचना हो तो-

1. आपके कंप्यूटर की सी ड्राइव में कम-से-कम 300 से 500 एमबी फ्री स्पेस हो। इसे देखने के लिए माई कंप्यूटर पर क्लिक करें, उसमें सी ड्राइव जहां लिखा है, उसके सामने स्पेस की जानकारी मिल जाती है।

2. अगर सी ड्राइव में स्पेस फुल हो तो वहां पड़ी बेकार की फाइलें और प्रोग्राम्स को डिलीट कर दें।

3. अगर सी ड्राइव की मेमरी में 256 एमबी से कम स्पेस बचा है तो गेम्स न खेलें।

4. हार्ड ड्राइव को अरेंज करने के लिए महीने में एक बार डिस्क फ्रेगमेंटर जरूर चलाएं। यह आपकी हार्ड डिस्क में सेव की गई अव्यवस्थित फाइलों और फोल्डरों को अल्फाबेट के हिसाब से दोबारा अरेंज करता है।

कैसे चलाएं डिस्क फ्रेगमेंटर

Start /Programmes / Accessories / System tool / Disk fragmenter पर क्लिक करने के बाद विंडो स्क्रीन पर आएगा। फिर उसमें Defragment ऑप्शन पर क्लिक करें। डिस्क क्लीनर के ऑप्शन पर क्लिक करते ही टेंपररी और करप्ट फाइलें इरेज हो जाती हैं।

5. अगर एक सिस्टम में दो विडियो ड्राइवर (मसलन, विंडो मीडिया प्लेयर और वीएलसी प्लेयर) हैं तो बारी-बारी उनका यूज करें, दोनों को एक साथ बिल्कुल न चलाएं।

6. किसी नए विंडो सॉफ्टवेयर को रीलोड करने से पहले उसके पुराने वर्जन को डिलीट करें।

7. इंटरनेट से ऐंटि-वायरस और प्रोग्राम डाउनलोड करने से परहेज करें, डुप्लिकेट ऐंटि-वायरस प्रोग्राम्स को करप्ट (खत्म) कर सकता है।

8. पुराने सॉफ्टवेयर पर नए प्रोग्राम्स को रन न करें।

9. नए प्रोग्राम के हिसाब से सॉफ्टवेयर लोड कर अपने सिस्टम को अपडेट करें।

10. जब एक साथ तीन सॉफ्टवेयर प्रोग्राम चल रहे हों तो इंटरनेट को यूज न करें।

11. जब सिस्टम स्लो होने लगे तो लगातार कमांड न दें वरना कंप्यूटर हैंग हो सकता है।

12. पेन ड्राइव यूज करते समय ध्यान रखें कि वह कहीं अपने साथ वायरस तो आपके कंप्यूटर से शेयर नहीं कर रहा है। पेन ड्राइव को सिस्टम से अटैच करने के बाद ओपन करने से पहले स्कैन करें। अगर आपके सिस्टम में इफेक्टिव ऐंटि-वायरस नहीं है, तो पेन ड्राइव को फॉर्मेट भी किया जा सकता है। फॉर्मेट करना बेहद आसान है। पेन ड्राइव का आइकन कंप्यूटर पर आते ही उस पर राइट क्लिक करें। फॉर्मेट का ऑप्शन आ जाता है। मगर ध्यान रखें कि फॉर्मेट करने पर पेन ड्राइव का पूरा डेटा डिलीट हो जाता है।

13. बीच-बीच में सिस्टम से टेंपररी इंटरनेट फाइल्स को भी डिलीट करना जरूरी है। इसके लिए ब्राउजर ( इंटरनेट एक्सप्लोरर या मोजिला) ओपन करते ही ऊपर की तरफ टूल्स का ऑप्शन लिखकर आता है। उस पर क्लिक कर इंटरनेट ऑप्शन को चुन लें। ऐसा करते ही एक नया विंडो खुलेगा, जिसमें एक ऑप्शन ब्राउजिंग हिस्ट्री और कुकीज को डिलीट करने का भी होगा। इस पर क्लिक करते ही टेंपरेरी फाइल्स डिलीट हो जाती हैं।

बायोस चेक करें

कंप्यूटर कारोबारी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल त्यागी के मुताबिक आपके सिस्टम में कौन-कौन से सॉफ्टवेयर हैं और उनका कॉनफिगरेशन क्या है, इस बारे में जानकारी के लिए बायोस चेक करें। कंप्यूटर ऑन करने के बाद और विंडो के अपलोड होने से पहले जब स्क्रीन ग्रे शेड की होती है और एक कर्सर ब्लिंक कर रहा होता है, उस समय F2 कमांड दें। सिस्टम का सारा कन्फीगरेशन आपके सामने होगा। अगर किसी सॉफ्टवेयर में एरर है, तो कंप्यूटर इस बारे में भी बताएगा।

वायरस को बाहर निकालो!

जेटकिंग से जुड़े एक्सपर्ट संजय भारती के मुताबिक वायरस चेक करने के लिए कंप्यूटर स्कैन करें। हालांकि कंप्यूटर में ऐक्टिव वायरस होने पर वंर्किंग के दौरान ही दिक्कतें आने लगती हैं। वायरस का नाम भी स्क्रीन पर कोने में आने वाले पॉप अप विंडो के जरिए आने लगता है। इसके अलावा वायरस होने पर तमाम फाइल और फोल्डर्स के डुप्लिकेट बनने लगते हैं। कई फोल्डर्स में ऑटो रन की फाइल अपने आप बन जाती है। बिना कमांड के अनवॉन्टेड फाइलें खुलने और बनने लगेंगी। जब कंप्यूटर इंटरनेट से कनेक्ट हो और लगातार ऐंटि-वायरस लोड करने की गुजारिश की जा रही हो तब मान लीजिए कि वायरस अटैक हो चुका है।

- सिस्टम से वायरस को हटाने के लिए ओरिजिनल ऐंटि-वायरस लोड करें, यह पूरे कंप्यूटर में वायरस को ढूंढकर खत्म करेगा।

इंटरनेट से फ्री में डाउनलोड होने वाले ऐंटि-वायरस की वैलिडिटी तय होती है। कई बार सिर्फ ट्रायल वर्जन ही मिलता है, इसलिए इंटरनेट से ऐंटि-वायरस उधार न लें तो बेहतर है।

अगर हार्डवेयर में प्रॉब्लम हो तो जिस कंपनी का प्रॉडक्ट हैं, वहां संपर्क करें। कई कंपनियां सिस्टम और पार्ट्स की गारंटी या वॉरंटी देती हैं, इस फैसिलिटी का उपयोग करें। एक्सपर्ट कंपनी के पार्ट्स को विश्वसनीय मानते हैं हालांकि नेहरू प्लेस, वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया या लोकल मार्केट से सिस्टम को दुरुस्त कराने में जेब कम हल्की होगी।